Monday, July 16, 2018

राह मुश्किल है मगर चल रहा हूँ मैं।।....!!

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राह मुश्किल है मगर चल रहा हूँ मैं।।....!!
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मेरे हालात वियोग के हैं मगर संयोग लिख रहा हूँ मैं।।
इस दौर में वक़्त के विपरीत चल रहा हूँ मैं।।
इन पेचीदा हालातों में भी ढल रहा हूँ मैं।।
जिसे तुम याद ना करो वो बेबस पल रहा हूँ मैं।।
                          राह मुश्किल है मगर चल रहा हूँ मैं।।

इस तेज धूप में बर्फ़ की भांति पिघल रहा हूँ मैं।।
लोग फ़िर भी कहते हैं, तुझसे बिन बात ही जल रहा हूँ मैं।।
हर रोज़ इन ठोकर भरी राहों में गिरकर संभल रहा हूँ मैं।।
धीरे-धीरे इस दल-दल से निकल रहा हूँ मैं।।
                           राह मुश्किल है मगर चल रहा हूँ मैं।।

जिसे दुनिया जानती अब शोहरत के लिए,
उस बदकिस्मत का भी कल रहा हूँ मैं।।
जिन्हें घमंड है अपनी क़ामयाबी का,
उन कच्ची दीवारों का भी बल रहा हूँ मैं।।
                             राह मुश्किल है मगर चल रहा हूँ मैं।।

सब दुखों परेशानियों को निगल रहा हूँ मैं।।
अब इस नए तेज़ाब में भी उबल रहा हूँ मैं।।
जिनके जीवन का एक क्षार हूँ,
उनके लिए भी कभी अमल रहा हूँ मैं।
                             राह मुश्किल है मगर चल रहा हूँ मैं।।

जो करते हैं मुझसे नफ़रत दिलों जान से,
उनके ख़ाबों का भी एक महल रहा हूँ मैं।
जो अब नाज़ करते हैं अपने दरख्तों की छाओं पर,
उन दरख्तों का भी चंबल रहा हूँ मैं।।
                              राह मुश्किल है मगर चल रहा हूँ मैं।।

जिनकी बातों में निवल हूँ,
उनके लिए भी सकल रहा हूँ मैं।
जिनकी आखों के आंसुओं का कारण हूँ मैं,
उन आंखों का भी काज़ल रहा हूँ मैं।।
                               राह मुश्किल है मगर चल रहा हूँ मैं।।
जो आया करती थी अक्सर तुम पर,
उन सभी समस्याओं का हल रहा हूँ मैं।।
जिन राहों में चला करती थी मेरे साथ तुम,
उन गुमनाम गलियों में टहल रहा हूँ मैं।।
                                राह मुश्किल है मगर चल रहा हूँ मैं।।

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