Monday, July 16, 2018

मैं जिसे दिन में देखना चाहूँ वो ख़्वाब है तू।।

मैं जिसे दिन में देखना चाहूँ वो ख़्वाब है तू।।
मेरे हर कठिन सवालों का जवाब है तू।।

जिसे बिन पिये ही नशा हो जाये आजकल,
ना जाने किस मैख़ाने का शराब है तू।।


मेरी हर नेकी और गुनाहों का हिसाब है तू।।
जो हार जाने पर भी नसीब हो मेरे लिए वो ख़िताब है तू।।


जिसे बचपन में रोज़ाना खाया करता था वो क़बाब है तू।।
क्या तारीफ़ करूँ तेरी अब तो लाज़वाब है तू।।

जो अंधकारों में भी मेरा सहारा बने वो आफ़ताब है तू।।
अमावस की काली रात में मेरे लिए मेहताब है तू।।

जो मुझे लोगों से बचाये वो नक़ाब है तू।।
जिसकी तारीफ़ ख़ुदा करे वो हिज़ाब है तू।।

जो तेरी दौलत पर मरते थे मरते होंगे,
मैं जिस पर मरता हूँ वो फ़ज़ा-ए-हुस्न-ओ-शबाब है तू।।

कुछ लोग मुझसे कहते हैं कि मैं कुछ ज़ाहिर नहीं करता,
अब वो नासमझ क्या जाने मेरे जीवन की इक खुली क़िताब है तू।।
#इश्तिखार_हाशमी।। 

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